आयकर कानूनों के तहत ये है कंस्ट्रक्शन के पूरे होने की अहमियत

By Jay Dee Infra In Property Tax, Tax Benefit No comments

आयकर कानूनों के तहत ये है कंस्ट्रक्शन के पूरे होने की अहमियत

अगर टैक्स छूट का फायदा लेना चाहते हैं तो प्रॉपर्टी का निर्माण पूरा होने में जो वक्त लगा है, वह बहुत अहम है। आइए आपको आयकर कानूनों के तहत कुछ प्रावधानों से रूबरू कराते हैं।

एेसे कई इनकम टैक्स प्रावधान हैं, जो किसी संपत्ति के निर्माण को पूरा करने के लिए किए गए समय के साथ फायदों को जोड़ते हैं।

होम लोन के मूल घटक के पुनर्भुगतान से जुड़ी कटौती:

होम लोन के मूल घटक (Principal Component) के पुनर्भुगतान पर सेक्शन 80सी के तहत 1.50 लाख तक टैक्स छूट मिलती है। किसी निर्माणाधीन संपत्ति या खुद के जरिए बनाई गई प्रॉपर्टी के मामले में आपकी ईएमआई तब तक शुरू नहीं होती, जब तक पूरी लोन राशि वितरित नहीं होती और यह आम तौर पर निर्माण के पूरा होने के साथ मेल खाता है। अगर निर्माण में कोई असामान्य देरी होती है तो आपकी ईएमआई निर्माण पूरा होने से पहले भी शुरू हो सकती है। एेसे मामलों में मूल पुनर्भुगतान पर आप टैक्स छूट क्लेम नहीं कर पाएंगे। क्योंकि इसकी इजाजत या तो सिर्फ प्रॉपर्टी के लिए है या घर की संपत्ति से होने वाली इनकम से (जिस पर टैक्स लगता हो)। जब तक प्रॉपर्टी पूरी नहीं हो जाती है और पोजेशन नहीं मिल जाता, जब तक यह टैक्सेबल नहीं हो सकता। इसलिए एेसी देरी के मामलों में आप वे फायदे गंवा देते हैं जो पोजेशन लेने से पहले लोन की मूल राशि (Principal Amount) के पुनर्भुगतान पर उपलब्ध होते हैं।

प्रॉपर्टी की कंस्ट्रक्शन के कारण लिए गए लोन पर ब्याज से जुड़ी कटौतियां:

आयकर कानूनों के सेक्शन 24 के तहत खरीद के लिए उधार लिए गए पैसे, कंस्ट्रक्शन, रिपेयर और घर के रेनोवेशन और रीकंस्ट्रक्शन से जुड़ी कटौतियां शामिल होती हैं। धारा 80सी के विपरीत, सेक्शन 24 के तहत आप कंस्ट्रक्शन के पूरा होने के साल से शुरू होने वाली पांच समान किस्तों में पोजेशन से पहले चुकाए गए बयाज पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। नतीजन, अगर कंस्ट्रक्शन के पूरे होने में देरी है तो लोन पर चुकाए गए ब्याज पर आप क्लेम कर सकते हैं।
इसके अलावा अगर घर में आप खुद रह रहे हैं तो निर्माण पूरा होने में लगने वाला समय उस राशि को निर्धारित करेगा, जिस पर आप ब्याज के लिए दावा कर सकते हैं। जिस वित्त वर्ष में आपने पैसा लिया था, उसके खत्म होने के पांच वर्ष के भीतर अगर कंस्ट्रक्शन पूरा हो जाता है तो आप दो लाख रुपये तक का ब्याज क्लेम कर सकते हैं। लेकिन अगर देर 5 साल से ज्यादा हो जाती है तो आपकी पात्रता (Entitlement) सालाना 30000 रुपये तक कम हो जाती है। ब्याज पात्रता की राशि मौजूदा साल के ब्याज और प्री-ईमआई इंट्रस्ट के एकमात्र हिस्से को साथ लिया गया है। ध्यान रखें कि किराये पर दी गई प्रॉपर्टी के लिए आप पूरा ब्याज क्लेम कर सकते हैं, चाहे निर्माण में देरी ही क्यों न हो गई हो।

कैपिटल गेन्स पर छूट का दावा करने की अहमियत:

अगर गेन्स नए घर में निवेश किया जाता है, जो तीन साल में बनवाया गया हो तो सेक्शन 54 और 54एफ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में छूट दिलाते हैं। लेकिन साल 2012 के किशोर एच गलाइया बनाम आईटीओ मामले में मुंबई ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर थोड़ी राशि भी घर के निर्माण में खर्च/निवेश की गई है और भले ही कंस्ट्रक्शन 3 साल में पूरी न हुई हो तो सेक्शन 54 और 54एफ के तहत छूट मिलेगी। लेकिन अगर निर्माण पूरा होने में देरी होती है तो इनकम टैक्स अफसर का नजरिया अलग हो सकता है और आपको छूट का दावा करने के लिए बड़े प्राधिकारी के पास अपील करनी होगी। इसलिए अगर मुकदमे में फंसना नहीं चाहते तो सुनिश्चित करें कि निर्माण 3 वर्षों में पूरा हो जाना चाहिए।

Source: Housing